सोलह सोमवार व्रत कथा
पावन व्रत कथा

सोलह सोमवार व्रत कथा

देवों के देव महादेव (शिव जी)
📅 व्रत समय: लगातार १६ सोमवार (श्रावण, चैत्र अथवा मार्गशीर्ष से प्रारंभ)

🎯 व्रत का उद्देश्य एवं फल

मनोवांछित वर/वधू की प्राप्ति, दांपत्य कलह से मुक्ति और सर्व मनोकामना पूर्ति

📖 सम्पूर्ण प्रामाणिक व्रत कथा

अमरावती के मंदिर में चौपड़ खेल: एक बार भगवान शिव माता पार्वती के साथ मृत्युलोक के अमरावती नगर में आए। वहाँ एक अत्यंत भव्य शिव मंदिर था। माता पार्वती ने भगवान शिव के साथ चौपड़ खेलने की इच्छा प्रकट की। उसी समय मंदिर का पुजारी ब्राह्मण वहाँ आया। पार्वती जी ने पूछा—"पुजारी जी! बताइए इस खेल में किसकी विजय होगी?" पुजारी ने बिना सोचे कह दिया—"भगवान शिव की विजय होगी।" किन्तु खेल के अंत में माता पार्वती जीत गईं।

पुजारी के असत्य बोलने पर पार्वती जी ने क्रोधित होकर उसे कोढ़ी होने का शाप दे दिया। कुछ दिनों बाद देवलोक की अप्सराएं उस मंदिर में पूजा करने आईं। पुजारी को दुःखी देखकर उन्होंने कारण पूछा। अप्सराओं ने पुजारी को सोलह सोमवार के व्रत का सम्पूर्ण विधान बताया। पुजारी ने श्रद्धापूर्वक लगातार 16 सोमवार तक निर्जला व्रत रखा और गेहूं के आटे के चूरमे के तीन भाग कर भगवान शिव को भोग लगाया। प्रभु की कृपा से उसका कोढ़ पूरी तरह समाप्त हो गया।

जब शिव-पार्वती पुनः उस मंदिर में आए, तो पार्वती जी पुजारी को निरोगी देखकर चकित रह गईं। पूछने पर पुजारी ने सोलह सोमवार का महात्म्य बताया। माता पार्वती ने स्वयं अपने रूठे पुत्र कार्तिकेय को वापस पाने के लिए यह व्रत किया। इसके प्रभाव से कार्तिकेय जी स्वयं माता के पास लौट आए। आगे चलकर एक निर्धन ब्राह्मण और एक राजकुमारी ने भी इसी पावन व्रत के प्रभाव से अखंड सुख, राज्य और उत्तम दांपत्य जीवन प्राप्त किया।

🪔 व्रत पूजा विधि एवं नियम

✨ व्रत उद्यापन विधि

17वें सोमवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है। इसमें सवा सेर आटे के चूरमे का भोग, 11 ब्राह्मणों को भोजन व दक्षिणा तथा शिव परिवार की विशेष आरती की जाती है।

← समस्त व्रत कथा संग्रह देखें

🪔 प्रभु वंदन की दृष्टि से: सोलह सप्ताह का अनुशासन — एक दिन का नहीं

सोलह सोमवार व्रत की सबसे स्पष्ट विशेषता इसकी संरचना में ही छिपी है — यह कोई एक दिन का व्रत नहीं, बल्कि लगातार सोलह सप्ताह तक, हर सोमवार को निभाया जाने वाला दीर्घकालिक अनुशासन है।

यह विस्तारित अवधि स्वयं एक गहरा संदेश देती है। कोई भी गहन परिवर्तन — चाहे वह किसी रिश्ते में सामंजस्य हो, किसी आदत में सुधार हो, या किसी लक्ष्य की प्राप्ति — एक दिन के प्रयास से नहीं, बल्कि निरंतर, सप्ताह-दर-सप्ताह दोहराए गए संकल्प से ही साकार होता है। बीच में एक भी सोमवार छूट जाने पर व्रत की निरंतरता टूट जाती है, जो हमें निरंतरता के महत्व को गंभीरता से लेने की सीख देता है।

यह व्रत इसीलिए केवल किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति का साधन नहीं, बल्कि स्वयं में अनुशासन, धैर्य और प्रतिबद्धता विकसित करने की एक दीर्घकालिक साधना भी है — एक ऐसा अभ्यास जो सोलह सप्ताह के बाद व्यक्ति के स्वभाव का ही अंग बन जाता है।

🔍 संबंधित पावन खोजें (Popular Searches):

🌸 संबंधित पावन पूजा, आरती एवं कथाएं

ॐ जय शिव ओंकारा (शिव आरती) आरती

ॐ जय शिव ओंकारा (शिव आरती)

Lord Shiva (भगवान शिव / महादेव)

देवाधिदेव महादेव शिव जी की यह प्रसिद्ध आरती ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के एकाकार स्वरूप की वंदना करती है। इसके नित्य पाठ से मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

श्री शिव चालीसा (सम्पूर्ण) चालीसा

श्री शिव चालीसा (सम्पूर्ण)

Lord Shiva (भगवान शिव / महादेव)

भगवान देवाधिदेव महादेव शिव जी की महिमा से परिपूर्ण 40 पावन चौपाइयों का स्तोत्र, जिसके पाठ से समस्त पाप, रोग और भय का नाश होता है।

प्रदोष व्रत कथा व्रत कथा

प्रदोष व्रत कथा

भगवान शिव (चंद्रमौलेश्वर महादेव)

संतान सुख, रोग-शोक निवारण, ग्रह दोष शांति और शिव सायुज्य (व्रत समय: प्रत्येक मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (प्रदोष काल))

श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) स्तोत्र

श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram)

भगवान शिव

लंकानरेश रावण विरचित परम तेजस्वी शिव ताण्डव स्तोत्रम् सम्पूर्ण श्लोक व भावार्थ।

📅

आज का पंचांग एवं शुभ मुहूर्त

पूजा एवं व्रत के लिए आज की शुभ तिथि, अभिजित मुहूर्त एवं चौघड़िया देखें।

पंचांग देखें →