🛕 Lord Shiva (महामृत्युंजय)

महामृत्युंजय मंत्र (108 जाप हेतु)

Maha Mrityunjaya Mantra (for 108 Jaap)

ऋग्वेद (7.59.12) का यह संजीवनी महामंत्र अकाल मृत्यु के भय, असाध्य रोगों और मानसिक क्लेशों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।

॥ महामृत्युंजय मंत्र ॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॥ भावार्थ ॥ हम त्रि-नेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सम्पूर्ण सृष्टि का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल लता के बन्धन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु और बन्धनों से मुक्ति मिले।

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और जीवन को पोषण प्रदान करते हैं। जिस प्रकार पका फल डंठल से स्वतः मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु और बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करें।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप कैसे करें?

रुद्राक्ष की माला से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर, शांत चित्त से 108 बार शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।